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Essay On Jal Hi Jeevan Hai

जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट है ‘जल ही जीवन है’| इस पृथ्वी पर मनुष्य और जीव जानवर तो क्या पेड़-पोधे तक पानी बिना जीवित नही रह सकते| रहीमदासजी ने सत्य ही कहा है”रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून; पानी गये न ऊबरे मोती मानुष चून|” विज्ञान की दृष्टि से भी देखे तो ज्ञात होगा कि मानव शरीर  का दो तिहाई हिस्सा जलीय है| पृथ्वी का ७५ प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका है पर ये समस्त पानी पीने लायक नही है| पानी के बहुप्रयोग है जैसे पेयजल, सिंचाई में, कल- कारखानों में, निर्माण प्रक्रिया में इत्यादि| इस प्रकार स्पष्ट है कि मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में जल उतना ही आवश्यक है जितना वायु है|

         वर्तमान में हम जल के अभाव के दौर से गुजर रहे है क्योंकि हमने जल संरक्षण के परम्परागत तरीके भुला दिए है और हम इसका अंधाधुंध प्रयोग कर रहे है| कितने ही क्षेत्र ऐसे है जहां पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नही है| न ही वहा ऐसी तकनीक उपलब्ध है जो जल को शुद्ध कर सके| उन प्राणियों के हित को नजरंदाज करके हम पानी का दुरुपयोग करते है| आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही तालाब पर मनुष्य और जानवर दोनों साथ पानी पीते है|  वहीं शहरी इलाकों में घर ,कार और पालतू कुत्ते की धुलाई ढेर सारे पानी से की जाती है| प्राकृतिक संसाधनों का दुरूपयोग करने पर पृकृति हमें दंडित करती है अत: कभी अतिवृष्टि तो कही अनावृष्टि करके एक असंतुलन कायम हो रहा है| ये शुभ संकेत नहीं है|

            निसंदेह वैश्विक स्तर पर जल संरक्ष्ण के प्रयास किये जा रहे है| अनेक गोष्ठियों व सेमिनार आयोजित की जा रही है| मीडिया के माध्यम से लोगों में जागृति लाई जा रही है| पानी को रीसायकल करके प्रयोग किया जा रहा है| पर क्या ये पर्याप्त है| जब तक लोग स्वयं जागरूक नहीं होंगे ये उपाय लम्बे समय तक कारगर नहीं होंगे| अत: हम सबको संकल्प लेना होगा कि हम अपने घरों में वर्षा जल संरक्षण करेंगे| सब्जियों धोने से बचा पानी पोधो में डालेंगे| घर और वाहनों को गीले कपड़े से पोंछेंगे| कहीं भी नल खुला दिखने पर उसे तुरंत बंद करेंगे| अपने आस-पास के लोगो को जल का महत्व समझायेंगे| आर ओ का कम से कम इस्तेमाल करेंगे क्योंकि ये पानी के जरूरी मिनरल्स हटा देता है और इस प्रक्रिया में बहुत सा पानी खर्च होता है| ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करेंगे ताकि प्राकृतिक तरीके से ही अच्छी वर्षा हो| सरकार  को भी वृहद स्तर पर योजना बनाकर नदियों को जोड़ना चाहिए ताकि जल का समान वितरण हो सके| जल के बिना जीवन असंभव है अत: जल बचाना एक यग्य के सदृश है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आहुति जल बचाकर देनी चाहिए| हमे रोजमर्रा के कार्यो में जल बचाने की आदत विकसित करनी चाहिए|

जल का महत्व


जल, मानव जाति के लिए प्रकृति के अनमोल उपहारों में से एक है। मानव शरीर में दो तिहाई मात्रा पानी की है। इससे स्पष्ट है कि जल का हमारे जीवन में कितना महत्व है। पृथ्वी के हर जीव के लिए जल की बहुत आवश्यकता होती है। पेड़-पौधों के लिए भी जल की बहुत आवश्यकता होती है। जल तरल, ठोस एवं गैस रूप में विद्यमान होता है। 


जल जीवन का सबसे आवश्यक घटक है और जीविका के लिए महत्वपूर्ण है। यह समृद्र, नदी, तालाब, पोखर, कुआं, नहर इत्यादि में पाया जाता है। हमारे दैनिक जीवन में जल का बहुत महत्व है। हमारा जीवन तो इसी पर निर्भर है। यह पाचन कार्य करने के लिए शरीर में मदद करता है और हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। यह हमारी धरती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हमारे जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण घटक है और एक सार्वभौमिक विलायक है।

जल के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना भी कठिन है। परन्तु विडंबना है कि जल के महत्व को समझते हुए भी मनुष्य ने इसे दूषित करना प्रांरभ कर दिया है। जल-प्रदूषण और जल की बर्बादी के परिणामस्वरूप अब हमारे पीने के लिए ही शुद्ध जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं हैं। यह भविष्य के लिए कदापि उचित नहीं है। जल जीवन के अमृत के रूप में जाना जाता है। इसलिए जीवन को बचाने के लिए पानी का संरक्षण अति आवश्यक है।